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बाथरूम रोमांस

पुष्पनगर शहर की प्रतिष्ठित सोफिया कॉलेज फॉर वुमेन में आज नए सत्र का पहला दिन था। कॉलेज के मुख्य द्वार पर अजब हलचल थी—नई छात्राओं की भीड़ हर तरफ उमड़ रही थी। कोई अपने दस्तावेज़ समेटने में लगी थी तो कोई नई सहेलियों के साथ ठहाके लगाते हुए अंदर जा रही थी।

प्रिंसिपल ऑफिस में खुद प्रिंसिपल साहब एडमिशन की रसीदें जाँच रहे थे। पूरा माहौल उत्साह और हलचल से भरा था।

तभी अचानक कॉलेज के ग्राउंड में एक चमचमाती गाड़ी आकर रुकी। दरवाज़ा खुला और उसमें से एक लड़की उतरी—कदमों में इतना भरोसा था मानो पूरी दुनिया उसके पैरों में हो। जैसे ही वह आगे बढ़ी, आसपास की सभी लड़कियों की नज़रें अपने आप उसकी ओर मुड़ गईं। उसकी खूबसूरती में एक अनोखा आकर्षण था। सादगी और स्टाइल का वह मेल देखते ही बनता था। सफेद कुर्ता और काली घेरदार लेहंगा में वह बेहद शानदार लग रही थी। हवा के हल्के झोंकों के साथ उसके बाल लहरा रहे थे और चेहरे पर एक शांत मगर गहरा असर छोड़ने वाली मुस्कान थी। बिना किसी से एक शब्द कहे, वह सीधे प्रिंसिपल ऑफिस की ओर बढ़ गई।

ऑफिस का दरवाज़ा खुला। वह अंदर गई और अपनी एडमिशन रसीद प्रिंसिपल साहब के सामने रख दी। प्रिंसिपल साहब ने जैसे ही नज़र उठाई, एक पल के लिए ठिठक गए। उनकी आँखों में हैरानी साफ दिख रही थी।मानो उन्होंने इतनी दबंग और प्रभावशाली पर्सनैलिटी पहली बार देखी हो। कुछ सेकंड तक वह बस उसे देखते रहे, फिर संभलते हुए बोले, "हाँ बेटा, आपका एडमिशन हो जाएगा।"

लड़की ने सादगी से कहा, "जी सर।"

वह ऑफिस से बाहर निकल ही रही थी कि प्रिंसिपल साहब भी उसके पीछे आ गए। उन्होंने अपने कमरे के बाहर रखी बड़ी घंटी को बजाया। उसकी आवाज़ सुनते ही सारी छात्राएँ इकट्ठा हो गईं। प्रिंसिपल साहब ने सबको सूचना दी, "सभी छात्राएँ अपने हॉस्टल के कमरे में जाएँ और आराम करें। कल से तुम्हारी कक्षाएँ शुरू होंगी।"

प्रिंसिपल साहब की बात सुनते ही सब लड़कियाँ अपने कपड़ों के बैग लेकर हॉस्टल के कमरों की ओर बढ़ गईं। वह नई लड़की भी अपनी गाड़ी के पास गई, अपना बैग उठाया और हॉस्टल की ओर चल पड़ी। ड्राइवर उसे छोड़कर वापस लौट गया।

वह अपना बैग उठाकर हॉस्टल के कमरे में दाखिल हुई। कमरे में पहले से तीन लड़कियाँ मौजूद थीं—रागिनी, वेदिका और तनिषा। तीनों ही शरारती और मस्तमौला किस्म की लग रही थीं।

रागिनी ने तुरंत बिस्तर से उठकर उसके हाथ से भारी-सा बैग लिया और बिस्तर पर रख दिया। फिर प्यार से नई लड़की को बिस्तर पर बैठाया और वेदिका से बोली, "जा, पानी ले आ।"

तनिषा उत्सुकता से पास आकर बैठ गई। रागिनी ने मुस्कुराते हुए पूछा, "सुन, तेरा नाम क्या है?"

नई लड़की ने बिना किसी हिचकिचाहट के साफ आवाज़ में कहा, "नव्या।"

उसकी आवाज़ की मिठास और उसके चेहरे का आकर्षण देखकर तीनों अभी भी थोड़ी हैरान थीं। तनिषा ने शरारती अंदाज़ में नव्या को बिस्तर से उठाकर इधर-उधर देखा और फिर बोली, "अरे वाह! तू तो हमारी कमरे की चौथी रानी है।"

इतने में वेदिका पानी लेकर आई और नव्या को दे दिया। नव्या ने जल्दी से पानी पिया और रागिनी से कहा, "मुझे फ्रेश होना है, बाथरूम कहाँ है?"

तनिषा ने मजाक में कहा, "अरे पगली, हम सब लड़कियाँ हैं ना! ये गर्ल्स हॉस्टल है।टीचरों को छोड़कर यहाँ कोई लड़का घुसता ही नहीं। तो बस यहीं कपड़े उतार लो। वैसे भी, हम तुझे बिना कपड़ों के देखना चाहती हैं!"

तनिषा की बात सुनते ही वेदिका और रागिनी भी बोल पड़ीं, "हाँ-हाँ, हमें भी तो देखना है!" तीनों की हँसी से कमरा गूँज उठा।

नव्या भी ज़ोरों से हँसते हुए गाली देकर बोली, "तुम तीनों भी तो बिलकुल मेरी वाली हरामी लग रही हो! घरवाले मुझसे तंग आकर यहाँ सुधरने के लिए छोड़ गए, लेकिन यहाँ भी हरामखोर दोस्त मिल गए।" इतना कहकर वो अपने बैग में हाथ डालकर एक सेट कपड़े निकाल लाई और तीनों से बोली, "चलो अब तुम भी अपने कपड़े ले लो। आज हम चारों मिलकर बाथरूम में नहाएँगी और एक-दूसरे की सॉफ्ट पार्ट्स चेक करेंगी!"

चारों हँसते-खिलखिलाते बाथरूम की ओर बढ़ीं और दरवाजा बंद कर लिया। बाथरूम में हल्का-सा उजाला फैला था। तनिषा ने सबसे पहले अपने कपड़े उतार फेंके। अब उसके शरीर पर सिर्फ ब्लैक बिकनी और शॉर्ट्स अंडरवियर बाकी थे। उसे देखकर रागिनी और वेदिका ने भी जल्दी से कपड़े निकाले और पूरी तरह नंगी हो गईं।

तनीषा नव्या के पास पहुँची, हँसते हुए बोली, "अब तू किसकी राह देख रही है? तेरे लिए कोई लड़का आएगा क्या कपड़े उतारने? वैसे भी आए तो तेरा ये खूबसूरत जिस्म देखकर उसका पानी ही निकल जाएगा!"

नव्या की हँसी फूट पड़ी। वो बोली, "पास आ ना, तू ही मेरे कपड़े उतार दे!"

तनीषा ने शरारती मुस्कान के साथ कहा,"ठीक है, आज मैं ही लड़का बन जाती हूँ। और हाँ, इस बहाने तुझे छूने का मौका भी मिलेगा!"

𝚃𝚘 𝚋𝚎 𝚌𝚘𝚗𝚝𝚒𝚗𝚞𝚎𝚍... My Sexy Teacher

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